सिद्धार्थनगर। अपने स्वाद और सुगंध के कारण विशेष पहचान रखने वाले कालानमक चावल के लिए फिर विदेशी बाजार तैयार हो रहा है। 15 माह बाद गैर बासमती चावल के अंतर्गत कालानमक के निर्यात की अनुमति मिली है और निर्यात शुरू होने वाला है। पहली बार नीदरलैंड से पांच टन चावल का ऑर्डर मिला है, जबकि अन्य देशों में भी निर्यात का प्रयास शुरू कर दिया गया है।
साल 2018 में कालानमक चावल को ओडीओपी में शामिल किया गया। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई ब्रांडिंग से इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती गई, लेकिन मिलावटखोरों ने साख गिरा दी। इसी बीच जून 2023 में कालानमक चावल के निर्यात पर ग्रहण लग गया। अब इसके निर्यात का रास्ता खुला है तो प्रशासन ने चावल की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया है। संभावना है कि अब लंबी डंठल वाले कालानमक धान के चावल की और अच्छी कीमत मिलेगी। महत्वपूर्ण बात है कि सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल की मांग पहली बार नीदरलैंड से आई है।